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02 July 2020

Divorce Yogas according to astrology.



Is Everyone You Know Secretly Planning Their Divorce?



जन्म-कुंडली में तलाक के योग-

जन्म कुंडली में लग्न से सप्तम भाव पीड़ित हो,सप्तमेश पीड़ित हो तो तलाक हो सकता है,तलाक करवाने के लिए सूर्य,शनि,मंगल,राहु जिम्मेदार ग्रह हैं |

षष्ठेश एक अलगाववादी ग्रह हो और वह दूसरे, चतुर्थ, सप्तम व बारहवें भाव में स्थित हो तब भी अलगाव होने की संभावना बनती है |

जन्म-कुंडली में सप्तमेश और शुक्र(स्त्री की कुंडली में गुरु) का अस्त होना भी विवाहिक जीवन में समस्या को अंकित करता है | जन्म कुंडली में शुक्र आर्द्रा, मूल, कृत्तिका या ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित हो तब भी दांपत्य जीवन में अलगाव के योग बनते हैं |

बारहवें भाव के स्वामी की चतुर्थ भाव के स्वामी से युति हो रही हो और चतुर्थेश कुंडली के छठे,आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो तब पति-पत्नी का अलगाव हो जाता है।

अलगाव देने वाले ग्रह शनि, सूर्य तथा राहु का सातवें भाव, सप्तमेश और शुक्र पर प्रभाव पड़ रहा हो या सातवें व आठवें भावों पर एक साथ प्रभाव पड़ रहा हो |

जन्म कुंडली में सप्तमेश की युति द्वादशेश के साथ सातवें भाव या बारहवें भाव में हो रही हो |

सप्तमेश व द्वादशेश का आपस में राशि परिवर्तन हो रहा हो और इनमें से किसी की भी राहु के साथ हो रही हो |

सप्तमेश व द्वादशेश जन्म कुंडली के दशम भाव में राहु/केतु के साथ स्थित हों |

जन्म कुंडली में शनि या शुक्र के साथ राहु लग्न में हो या जन्म कुंडली में सूर्य, राहु, शनि व द्वादशेश सप्तमेश या चतुर्थ भाव में स्थित हो |

कुंडली के लग्न या सातवें भाव में राहु व शनि स्थित हो और चतुर्थ भाव अत्यधिक पीड़ित हो तब भी अलग होने के योग बनते हैं.

शुक्र से छठे, आठवें या बारहवें भाव में पापी ग्रह स्थित हों और कुंडली का चतुर्थ भाव पीड़ित अवस्था में हो तो भी विवाहिक जीवन में कष्ट आते हैं |

यदि कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी छठे भाव में स्थित हो या छठे भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में हो तब यह अदालती तलाक दर्शाता है अर्थात पति-पत्नी का तलाक कोर्ट केस के माध्यम से होगा |

यदि जन्म कुंडली में षष्ठेश वक्री अवस्था में स्थित है अथवा यदि जन्म कुंडली में अष्टमेश की छठे भाव पर दृष्टि हो या किसी वक्री ग्रह की (विशेषकर शुक्र की) आठवें भाव पर दृष्टि हो, तब भी कोर्ट केस बहुत लंबे समय चलते हैं |

01 July 2020

Know about your disturbed Chakra and process to Balace these 6 Charkras in Hindi.

जानिए आपके शरीर का कौन सा चक्र बिगडा हुआ है एवं उस को ठीक कैसे करें ?

(1) मूलाधार चक्र Sky Element Lam Beej  Sound . Listening & Speaking Ears Linguistics लं ङं ञं णं नं मं क्षं अं अः ऌं ॡं
 - गुदा और लिंग के बीच  11 पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। इसके बिगड़ने से वीरता, धन ,समृधि ,आत्मबल ,शारीरिक बल ,रोजगार, कर्मशीलता, घाटा, असफलता  रक्त  एवं हड्डी के रोग, कमर व पीठ में दर्द, आत्महत्या के  बिचार ,डिप्रेशन  ,केंसर अदि होता है।

(2) विशुद्धख्य चक्र - Air Element , Ham beej , Throat , Language , Exression , Touch & feel  हं कं चं टं पं तं शं अं आं
कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह सरस्वती का स्थान है । यह 9  पंखुरियों वाला है। यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है, इसके बिगड़ने पर वाणी दोष, अभिब्यक्ति में कमी ,गले ,नाक,कान,दात, थाई रायेड, आत्मजागरण में  बाधा आती है।

(3) अनाहत चक्र Fire Element Yam Beej , Blood , Heart , Pancreas , Liver
यं खं छं ठं थं फं  षं इं ईं एं ऐं
- हृदय स्थान में अनाहत चक्र है । यह 11 पंखरियों वाला है । इसके बिगड़ने पर लिप्सा, कपट, तोड़ -फोड़, कुतर्क, चिन्ता,नफरत ,प्रेम में असफलता ,प्यार में धोखा ,अकेलापन ,अपमान, मोह, दम्भ, अपनेपन में कमी ,मन में उदासी , जीवन में बिरानगी ,सबकुछ होते हुए भी बेचनी, छाती में दर्द ,साँस लेने में दिक्कत ,सुख का अभाव, ह्रदय  व फेफड़े के रोग, केलोस्ट्राल में बढ़ोतरी अदि ।

(4) स्वाधिष्ठान चक्र Water Element Ram Beej , Emotions , Taste , tongue , 
रं ळं घं झं ढं धं भं ऋं ॠं
 - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी 9  पंखुरियाँ हैं । इसके बिगड़ने पर क्रूरता,गर्व,आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, नपुंसकता ,बाँझपन ,मंद्बुधिता ,मूत्राशय  और गर्भाशय  के रोग ,अध्यात्मिक  सिद्धी में बाधा   बैभव के आनंद में कमी  अदि होता है।

(5) मणिपूर चक्र Earth Element  Vam Beej ,Praan ( Sharir Sanchalan ki Visheshta)  , Nabhi , Smell , Nose 
वं  सं गं जं डं दं बं  उं ऊं ओं औं
- नाभि में 11 दल वाला मणिचूर चक्र है । इसके इसके बिगड़ने पर तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, अधूरी सफलता ,गुस्सा ,चिंडचिडापन, नशाखोरी, तनाव ,शंकलुप्रबिती,कई तरह की बिमारिया ,दवावो का  काम न करना ,अज्ञात भय ,चहरे का तेज गायब ,धोखाधड़ी, डिप्रेशन,उग्रता ,हिंशा,दुश्मनी ,अपयश ,अपमान ,आलोचना ,बदले की भावना,एसिडिटी, ब्लडप्रेशर,शुगर,थाईरायेड, सिरएवं शारीर के दर्द,किडनी ,लीवर ,केलोस्ट्राल,खून का रोग आदि  इसके बिगड़ने का मतलब  जिंदगी  का  बिगड़ जाना । 


(6) आज्ञाचक्र - Direction ( + - षं षः)
 भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ '?' उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर आदि का निवास है । इसके बिगड़ने पर एकाग्रता ,जीने की चाह,निर्णय की सक्ति, मानसिक सक्ति, सफलता की राह आदि इसके बिगड़ने  मतलब  सबकुछ  बिगड़ जाने का  खतरा।